Posted on 14 Mar, 2019 04:00 pm

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सोनी राजदान की फिल्म 'नो फ़ादर्स इन कश्मीर' 5 अप्रैल को रिलीज के लिए तैयार

सेंसर बोर्ड के द्वारा 8 महीनों के लंबे वक़्त तक रोक लगाए जाने के बाद, अब पूरे देश के दर्शकों को 2019 की सबसे ज़्यादा इंतज़ार की जानेवाली एक फ़िल्म देखने को मिलेगी। यह फ़िल्म इस हफ़्ते की शुरुआत में सुर्ख़ियों में रही थी, जब इसकी पिछले कुछ महीनों से चल रही लड़ाई ख़त्म हुई और आखिरकार न्याय और यूए सर्टिफिकेट मिला। अश्विन कुमार, जिन्होंने इस फ़िल्म का निर्देशन किया है उन्हें पहले एक बार उनकी एक शॉर्ट फ़िल्म, लिटिल टेररिस्ट के लिए ऑस्कर के लिए नामांकित किया जा चुका है और कश्मीर की सच्चाई बयां करनेवाली फ़िल्मों - इंशाल्लाह फुटबॉल और इंशाल्लाह कश्मीर के लिए वे दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं। नो फ़ादर्स इन कश्मीर, उनकी 'कश्मीर की तिगड़ी' की तीसरी फ़िल्म है। उम्मीद, शांति, और मानवता जैसे मुद्दे उनकी अब तक की हर फिल्म में ख़ास तौर पर नज़र आते हैं और नो फ़ादर्स इन कश्मीर में भी कुछ ऐसे ही जज़्बात को दिखाया गया है।

ऑस्कर के लिए नामांकित और दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार के विजेता निर्देशक, अश्विन कुमार की ओर से इस फ़िल्म का पहला पोस्टर पेश किया गया। इस फ़िल्म के लेखक और निर्देशक होने के अलावा, अश्विन फिल्म के मुख्य क़िरदारों में से भी एक हैं जिनके साथ इसमें सोनी राजदान, कुलभूषण खरबंदा, अंशुमान झा और माया सराओ भी शामिल हैं और यह फ़िल्म पूरे हिंदुस्तान के सिनेमाघरों में 05 अप्रैल 2019 को रिलीज़ होने वाली है।

फ़िल्म के निर्माताओं ने अब फिल्म का फर्स्ट लुक पोस्टर रिलीज़ किया है जिसमें एक फोन की टूटी हुई स्क्रीन दिखाई दे रही है जिसके पीछे दो आकर्षक नीली आँखों वाले, 16 साल के बच्चे खड़े नज़र रहे हैं। यह कहानी एक 16 साल की ब्रिटिश कश्मीरी लड़की, नूर पर आधारित है, जो अपने पिता की तलाश में अपनी जड़ों को ढूँढने निकलती है। तब उसकी मुलाकात माजिद से होती है, जो वहीँ का एक लड़का होता है और उसपर फ़िदा हो जाता है, वो उसे भारत-पाक सीमा के पास एक ख़तरनाक से इलाक़े में ले जाता है जहाँ जाना मना होता है। वहाँ उन्हें किसी रहस्य का पता चलता है और बात तब बिगड़ जाती है जब उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। नूर को जल्दी ही छोड़ दिया जाता है जबकि माजिद को नहीं छोड़ा जाता। उसकी वजह से मुसीबत में पड़े माजिद को रिहा कराने के लिए नूर किस हद तक जायेगी। और क्या इन दोनों के बीच पहले जैसा प्यार हो सकेगा?

एक बेबाक़ टैगलाइन "हर कोई सोचता है कि वो कश्मीर को समझता हैं" के साथ इस फ़िल्म के निर्माता साफ़-साफ़ इस फ़िल्म और इसकी कहानी से की जा रही उम्मीद की ओर इशारा कर रहे हैं।