Posted on 09 Feb, 2019 04:00 pm

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फिल्म समीक्षा: कितनी प्रभावित करती है सपना चौधरी की डेब्यू फिल्म 'दोस्ती के साइड इफेक्ट्स'

फिल्म समीक्षा: दोस्ती के साइड इफेक्ट्स , डायरेक्टर: हादी अली अबरार, अवधि2 घंटा 10 मिनट,  कलाकार: सपना चौधरी,विक्रांत आनंद,नील मोटवानी,जुबैर के. खान,अंजू जाधव, रेटिंग: ढाई स्टार. इस हफ्ते रिलीज़ होने वाली फिल्मो में डायरेक्टर हादी अली अबरार की फिल्म दोस्ती के साइड इफेक्ट्स' भी शामिल है. जिससे हरियाणा की मशहूर सिंगर, डांसर और 'बिग बॉस' की प्रतियोगी रहीं सपना चौधरी ने डेब्यू किया है. सपना के सिल्वर स्क्रीन पर आने की वजह से उनके प्रशंसक उत्साहित थे लेकिन शायद अपनी पहली फिल्म के रूप में उन्होंने सही स्क्रिप्ट का चुनाव नहीं किया. सपना चौधरी की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म ‘दोस्ती के साइड इफेक्ट्स’ दर्शकों के दिलों पर अपना इफेक्ट डालने में सफल नहीं रही है।

फिल्म की कहानी की बात करें तो यह बचपन के बेहद करीबी चार दोस्तों की स्टोरी है जिनके नाम हैं सृष्टि (सपना चौधरी), रणवीर (विक्रांत आनंद), गौरव (जुबैर ए. खान) और अवनी ( अंजू जाधव). पूरी फिल्म इन्ही चारों किरदारों के इर्द गिर्द घुमती है. बचपन के यह गहरे दोस्त हालात की वजह से बिछड़ जाते हैं मगर कॉलेज में किस्मत उन्हें एक बार फिर मिलवा देती है. कॉलेज में  वे अपने बीते हुए दिन और आने वाले कल के बारे में बातें करते हैं। सृष्टि के ईमानदार पिता को एक झूठे इलज़ाम में फंसा कर ख़ुदकुशी के लिए मजबूर किया गया था, इसलिए वह एक आइपीएस ऑफिसर बनकर अपने पिता के साथ हुए बुरे व्यवहार का बदला लेना चाहती है। जबकि रणवीर और उसकी मां को बचपन में ही उसके एमएलए बाप ने दूसरी पत्नी और उसके सौतेले भाई के लिए छोड़ दिया था, इसलिए रणवीर बड़ा पॉलिटिशियन बनकर अपने बाप से ही बदला लेना चाहता है. उधर गौरव अपनी लाइफ में कुछ कर दिखाने का जज्बा रखता है तो अवनी को दौलत का नशा है और किसी अमीर शख्स से शादी करके लाइफ को सेट कर लेना चाहती है। कॉलेज के चुनाव के दौरान चारों दोस्तों के बीच एक बड़ी गलतफहमी पैदा हो जाती है और उसके बाद कहानी में बड़ा टर्न और ट्विस्ट पैदा होता है. इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

फिल्म का कलाइमैक्स देख कर लगता है कि जैसे आप अब्बास मस्तान या विक्रम भट्ट की कोई थ्रिलर फिल्म देख रहे हैं जहाँ हर कुछ अन्तराल के बाद एक नया ट्विस्ट पैदा हो रहा है. जहाँ तक बात है सपना चौधरी की एक्टिंग की. सच पूछिए तो अभी उन्हें अदाकारी के स्तर को समझना होगा. सृष्टि के रोल में सपना चौधरी कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाई हैं। वह बेहद ओवर एक्ट करती हुई और बहुत लाउड दिखीं. अल्ताफ सैयद और मेनी वर्मा का म्यूजिक और बेहतर होना चाहिए था जबकि यह डांसर सपना चौधरी की डेब्यू फिल्म थी तो उनके लिए हिट गाने बनाने चाहिए थे. फिल्म का कोई भी गाना उनके ब्लाकबस्टर गीतों जैसा नहीं है। हालाँकि फिल्म में सपना का एक आयटम नंबर भी मौजूद है लेकिन वह भी कोई असर छोड़ने में सफल नहीं रहा।

जहाँ तक निर्देशन की बात है ‘दोस्ती के साइड इफेक्ट्स’ में हादी अली अबरार ने अपनी ओर से कोशिश की है मगर इसकी कहानी और स्क्रीन प्ले ही उतना कसा हुआ नहीं था जिससे कहानी बिखरती हुई महसूस होती है. फिल्म में स्पेशल इफेक्ट्स और विजुअल इफेक्ट्स काफी हैं फिल्म का नाम भी दोस्ती के साइड इफेक्ट्स है मगर फिल्म की कहानी इसे प्रभावी बनाने में चूक जाती है. रेटिंग: ढाई स्टार.