Posted on 11 Apr, 2019 04:00 pm

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'नो फादर्स इन कश्मीर' के मेकर्स ने सेंसर द्वारा एडिट किए गए दृश्यों की फुटेज जारी की

पिछले हफ्ते सिनेमाघरों में रिलीज फिल्म नो फादर्स इन कश्मीर को दर्शकों का बेहतर रिस्पांस मिल रहा है। घाटी में एक तरह से थोपी गई परेशानी की हालत में वर्षों से रहने वाले लोगों के भावनात्मक चित्रण के लिए फिल्म को हर तरफ से बेहतर शानदार समीक्षा मिल रही है। निर्देशक अश्विन कुमार ने 8 महीनों से भी ज्यादा समय तक की लड़ाई के बाद कुछ एडिट, डिस्क्लेमर और म्यूट या एडिट के साथ ही अन्य शर्तों के तहत सेंसर बोर्ड से यूए प्रमाण पत्र प्राप्त किया। अब मेकर्स ने कुछ अनदेखे दृश्यों के फुटेज जारी किये हैं, जिन्हें फिल्म के लिए संशोधित कर दिया गया है। अश्विन कहते हैं "सेंसर बोर्ड ने फिल्म में सबसे पहले इस कैप्शन को शामिल करने को कहा: "यह फिल्म कश्मीर में व्याप्त उग्रवाद और आतंकवाद से प्रेरित है" रातों की नींद हराम करने और 9 महीने तक एक के बाद एक लगातार सुनवाई के लिए दौड़ने के बाद उन्होंने बिना तर्क या किसी कानूनी औचित्य या तर्क के फिल्म में गलत बदलाव करने को कहा। अभी तक जो कुछ भी हुआ, उससे मैं काफी निराश हूं और इस कारण मैंने अभी तक थिएटर में अपनी फिल्म नहीं देखी है। इस फिल्म को बनाने में मुझे चार साल की अथक मेहनत करनी पड़ी। इसमें सेंसर की सात स्क्रीनिंग और छह सुनवाई शामिल है, जिसके कारण प्रेम के साथ की गई इस मेहनत को छोटा और विकृत करने के साथ ही इसके साथ समझौता तक करना पड़ा।

आप जो देखने वाले हैं, वे फिल्म के ऐसे दृश्य हैं जिसे उनके द्वारा काट दिया गया। इससे आपको पता चलेगा कि वे फिल्म को यूए या दर्शकों के लिए कम या ज्यादा उपयुक्त नहीं बनाते हैं - जो सेंसर का असली काम है। वीडियो के नीचे दिए गए विवरण में आप उन अस्वीकरणों को पढ़ सकते हैं, जिसे जोड़ने के लिए उन्होंने हमें मजबूर किया था। कश्मीर भावनात्मक संकट में है। यदि हमें कश्मीर में अपने सहयोगी नागरिकों के प्रति दयावान बनना है, तो हमें सच बताना शुरू करना होगा। उन्होंने कहा कि सेंसरशिप समाज में केवल नफरत, शत्रुता, संदेह और भय पैदा करने का काम करती है। वे कहते हैं - मैं केवल इतना ही कहना चाहता हूं कि फिल्में नहीं बल्कि सेंसरशिप डर पैदा करती है।