Posted on 06 Feb, 2020 07:40 pm

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संजय मिश्रा, शिखा मल्होत्रा की एक्टिंग ने फिल्म 'कांचली' को देखने लायक बना दिया

फिल्म समीक्षा, फिल्म: कांचली - लाइफ़ इन अ स्लू', कलाकार: संजय मिश्रा, शिखा मल्होत्रा और ललित परीमू, नरेश पाल सिंह चौहान, प्रस्तुतकर्ता : अनूप जलोटा, निर्देशक: देदिप्य जोशी, अवधि: 102 मिनट, सेंसर:  ए सर्टिफिकेट, रेटिंग्स ढाई स्टार.

बॉलीवुड में अब केवल मसाला इंटरटेनर फिल्मे ही नहीं बन रही हैं बल्कि अब रीयलिस्टिक सिनेमा और साहित्यिक कहानियों को भी सिल्वर स्क्रीन पर पेश किया जा रहा है. इस सप्ताह रिलीज हुई निर्देशक देदिप्य जोशी की फिल्म 'कांचली - लाइफ़ इन अ स्लू' भी एक ऐसी ही फिल्म है जो मशहूर साहित्यकार विजयदान देथा की कहानी पर बेस्ड है. आपको बता दें कि राजस्थान के प्रख्यात लेखक विजयदान देथा उर्फ बिज्जी भारतीय लिटरेचर और राजस्थानी भाषा के बेमिसाल रचनाकार रहे हैं और उन्हें लोककथा के जादूगर के रूप में लोग जानते हैं। उनकी कहानियों पर 'दुविधा' और शाहरुख़ खान की 'पहेली' जैसी कई बॉलीवुड फिल्मे बन चुकी हैं. 'कांचली' भी उन्ही की लिखी हुई एक साहित्यिक कहानी है जिसे इस फिल्म के जरिये पेश किया गया है. उनकी इस मशहूर लोक कथा को बखूबी परदे पे पेश किया गया है.

इस फिल्म की कहानी कुछ यूँ है. गाँव की बेहद खूबसूरत महिला कजरी (शिखा मल्होत्रा) के साथ किश्नू (नरेशपाल सिंह) की शादी हो जाती है। मगर गाँव के ठाकुर (ललित परीमू) का कजरी के प्रति बुरा इरादा था, इसलिए उन्होंने अपने खास आदमी भोजा (संजय मिश्रा) को उसके लिए कजरी को लाने के लिए कहा, लेकिन कजरी अपने पति के प्रति बहुत वफादार थी और एक दिन वह अपने बचाव में ठाकुर पर हमला कर देती है। अपनी पत्नी की हिम्मत की प्रशंसा करने के बजाय, उसका पति कजरी को चेतावनी देता है कि वह ठाकुर के साथ इस तरह का व्यवहार कभी न करे और कजरी के लिए यह दिल तोड़ने वाला था क्योंकि उसने कभी भी एक ऐसे पति की कल्पना नहीं की थी जो उसे दुनिया से लड़ने के लिए अकेला छोड़ देगा। साथ ही कजरी खुद को समझाने की कोशिश कर रही होती है कि अगर उसका पति उसे किसी अन्य पुरुष के साथ देखेगा तो वह जरूर प्रतिक्रिया देगा। यहां भोजा को कजरी से प्यार हो जाता है और यहीं से कजरी को एक आइडिया आता है कि वह भोजा की आड़ में अपने पति की परीक्षा लेगी और यह देखेगी कि आखिर उसके पति को उसके साथ दिखने के बाद कैसा महसूस होता है. तो यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर वो अपने पति की परीक्षा किस तरह से लेती है? और क्या उसे ऐसा कोई हल मिल जाता है, जिससे उसे इस बात का एहसास होता है कि एक औरत को किसी मर्द की ज़रूरत नहीं होती है या फिर उसे ऐसा कोई ज़रिया मिल जाता है जिससे अपने दम पर जीने का हौसला हासिल हो जाता है?

दरअसल यह फिल्म एक ऐसी कहानी है जो एक स्वतंत्र महिला के लिए अपने दम पर जीवित रहने के नए रास्ते खोलती है। पायशियन पिक्चर्स के बैनर तले बनी इस फिल्म के साथ अनूप जलोटा का नाम भी जुड़ा हुआ है जी हाँ, अनूप जलोटा इस मूवी को प्रस्तुत कर रहे हैं. देदिप्य जोशी इस फ़िल्म के डायरेक्टर हैं, जबकि विजयदान देथा की कहानी पर बेस्ड इसकी स्क्रिप्ट देदिप्य जोशी और कैलाश देथा ने लिखी है. आपको बता दें कि कांचली का अर्थ सांप की केंचुली होता है और राजस्थान में औरत की इज्जत को भी कांचली कहा जाता है. इस तरह यह एक सिम्बोलिक टाइटल है. इस फ़िल्म में मुख्य किरदार कजरी को प्ले किया है शिखा मल्होत्रा ने। और यह कहने में हर्ज नहीं है कि शिखा ने अपने इस किरदार को प्रभावी ढंग से निभाया है. एक औरत के दर्द और उसके कई पहलुओं को शिखा ने बड़े असरदार ढंग से जिया है.संजय मिश्रा वाकई कमाल के एक्टर हैं वह जब भी स्क्रीन पे आते हैं एक एनर्जी और एक हास्य का रंग भी ले आते हैं.

राजस्थानी बेकड्राप पर बनी इस हिंदी फीचर फिल्म कांचली में सभी आर्टिस्ट के पर्फोर्मेंस बेस्ड किरदार हैं. इसका कंटेंट ही इसका हीरो है. अंत में यही कहा जा सकता है कि संजय मिश्रा और शिखा मल्होत्रा की एक्टिंग ने फिल्म 'कांचली' को देखने लायक बना दिया है. फिल्म को क्रिटिक रेटिंग्स ढाई स्टार दी जाती है.